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निरंजनी अखाड़े के सचिव आशीष गिरि की मौत कैसे और किन परिस्थितियों में हुई। उन्होंने खुद को गोली क्यों मार ली। आत्महत्या करने से पहले उन्होंने किस-किस से फोन पर बात की थी। कहीं ऐसा तो नहीं कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष की कॉल आने के बाद वह तनाव में आ गए और जान दे दी। इन सवालों के जवाब दारागंज पुलिस तलाश रही है। पुलिस ने उनके दोनों मोबाइल और टैबलेट को कब्जे में ले लिया है। पुलिस का कहना है कि अगर मोबाइल में कॉल रिकार्डिंग मिली तो कई राज खुलेंगे।  दारागंज स्थित निरंजनी अखाड़े के सचिव आशीष गिरि ने रविवार सुबह पौने नौ बजे के करीब लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारकर जान दे दी थी। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरि ने बताया था कि सुबह आठ बजे उन्होंने कॉल करके नाश्ता के लिए बुलाया था। मठ में पहुंचने से पहले उन्होंने बीमारी से तंग आकर जान दे दी। वारदात के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद से जांच कराई। पुलिस को कमरे के अंदर आशीष गिरि के हाथ में वह पिस्टल मिली जिससे उन्होंने गोली मारी थी। 

इसके अलावा उनके दोनों मोबाइल और टेबलेट वहीं रखा था। फोरेंसिक टीम ने टैबलेट को चेक किया लेकिन उससे कुछ पता नहीं चला। वहीं दारागंज पुलिस ने बताया कि आशीष गिरि के दोनों मोबाइल पासवर्ड से लॉक हैं। एक्सपर्ट की मदद से लॉक खोलकर जांच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि अगर मोबाइल में रिकार्डिंग की सुविधा हुई तो मोबाइल से कई राज खुलेंगे। दूसरा पुलिस  आशीष गिरि के दोनों मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल मंगा रही है। इससे पता चलेगा कि आशीष गिरि ने किससे फोन पर बातचीत की थी। कहीं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरि के बाद तो किसी से फोन पर बात नहीं हुई थी।  निरंजनी अखाड़े के महंत आशीष गिरि की मौत के बाद दारागंज पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखकर दावा किया उन्होंने खुद को गोली मारी थी। सोमवार को हिन्दुस्तान ने घटनास्थल की फोटो, वीडियो और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. रंजीत की राय ली। डॉ. रंजीत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटना स्थल की फोटो देखकर बताया कि गोली दाहिनी तरफ से मारी गई थी और बाएं तरफ से निकल गई। गोली घुसने और निकलने के दौरान एक सेंटीमीटर छेद है। ऐसा तभी होता है जब गोली नजदीक से मारी गई हो। अगर दूर से गोली मारी गई होती तो निकासी के दौरान गोली का छेद का आकार बढ़ जाता। दूसरा यह भी कहा कि घटना स्थल पर छेड़छाड़ नहीं लग रही है। ऐसा नहीं है कि किसी ने गोली मार दी और उसके बाद सीन क्रिएट किया गया। तीसरा यह भी कहा कि अगर किसी दूसरे व्यक्ति ने गोली मारी होती तो कुछ विरोध होता और ऐसे में लाश की स्थिति दूसरी होती और खून के धब्बे दीवारों पर भी होते, जबकि ऐसा नहीं है। संत समाज में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद तरह की तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई। कहा जा रहा है कि आशीष गिरि का शराब पीने से लीवर खराब था तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि क्यों नहीं हुई। अगर उनकी हालत इतनी खराब थी कि वह मरने वाले थे तो वह दिल्ली छोड़कर यहां इलाज क्यों करा रहे थे। यह भी चर्चा रही कि इतना कुछ होने के बाद वह अपनी लाइसेंसी पिस्टल की लाइसेंस का सीमा विस्तार क्यों करना चाहते थे। इसका तो यही मतलब है कि वह प्रयागराज को छोड़कर कहीं दूसरी जगह जाना चाहते थे लेकिन क्यों, इसका कारण नहीं पता। लेकिन सभी यही मान रहे हैं कि उनकी मौत का कारण बीमार नहीं बल्कि कोई दूसरा कारण है। पुलिस भी दबाव में काम कर रही है। इसलिए अभी तक तफ्तीश धीमी है।


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