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मुंबई : पंजाब ऐंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक में पैसे जमा करने वाले हजारों लोगों को क्रेडिट इन्फर्मेशन ब्यूरो की ओर से डिफॉल्टर की कैटिगरी में डाला जा सकता है। बैंक से पैसे निकालने की हदबंदी किए जाने से उन्हें लोन की किस्तें चुकाने में दिक्कत हो रही है। इसके चलते उनके रीपेमेंट पर डिफॉल्ट शुरू हो गए हैं। डिफॉल्टर कैटिगरी में डाले जाने से दूसरी जगहों से कर्ज मिलने की गुंजाइश कम हो सकती है और उधार मिलेगा भी तो ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है। 

  • क्रेडिट इन्फर्मेशन ब्यूरो इक्विफैक्स में बिजनस डिवेलपमेंट ऑफिसर मनु सहगल ने कहा, 'कस्टमर के अपना पैसा नहीं निकाल पाने और क्रेडिट पेमेंट नहीं कर पाने पर निश्चित रूप से असर पड़ेगा। इसका असर इस बैंक में करंट अकाउंट रखने वाले कारोबारियों पर भी पड़ेगा।' उन्होंने कहा, 'पेमेंट डिफॉल्ट्स के कारण क्रेडिट स्कोर घटेगा।' 
  • 23 सितंबर को आरबीआई ने पीएमसी बैंक के बोर्ड और एमडी जॉय थॉमस को सस्पेंड कर दिया था। ऐसा बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद किया गया। आरबीआई ने शुरू में 1000 रुपये की विदड्रॉल लिमिट लगाई थी। बाद में इसे बढ़ाकर 40000 रुपये कर दिया गया।
  • बैंक के डेटा से पता चलता है कि मार्च तक 16 लाख डिपॉजिटर्स का 11617 करोड़ रुपये का डिपॉजिट इसके पास था। इसके 60 प्रतिशत से ज्यादा कस्टमर्स की जमा रकम करीब 10000 रुपये की है। 
  • क्रेडिट ब्यूरो क्रिफ हाई मार्क के वाइस प्रेसिडेंट रहे पारिजात गर्ग ने कहा, 'उन कस्टमर्स पर ज्यादा असर पड़ेगा, जिन्होंने पीएमसी बैंक से लोन लिया है और इसका रीपेमेंट नहीं कर पा रहे हैं। इसका असर इन कस्टमर्स के ब्यूरो स्कोर में दिखेगा।' उन्होंने कहा, 'बैंक या रेगुलेटरों की ओर से कोई संदेश नहीं आने पर क्रेडिट ब्यूरो को इन नॉन-पेमेंट्स को बकाया दिखाते रहना होगा, भले ही कस्टमर पैसा चुकाना चाहते हों।' 
  • इससे पहले आरबीआई ने नोटबंदी और प्राकृतिक आपदाओं जैसी स्थितियों में बॉरोअर्स के क्रेडिट प्रोफाइल पर आंच आ सकने को देखते हुए बॉरोअर्स के क्लासिफिकेशन के कुछ नियमों को नरम किया था। इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों का मानना है कि इस मामले में भी उसी तरह की नरमी की जरूरत है।

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