एमपीएससी आंदोलन पर शरद पवार ने सरकार से की बड़ी अपील
पुणे : महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर पुणे में जारी अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार से प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बातचीत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि छात्रों की शिकायतों और मांगों को गंभीरता से सुनते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए। शरद पवार ने रविवार को कहा कि पुणे के साथ मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी छात्रों के बीच असंतोष दिखाई दे रहा है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार और संबंधित शिक्षण संस्थानों को छात्रों की चिंताओं पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत और संवाद के जरिए निकालने की कोशिश होनी चाहिए।
पवार ने कहा, “छात्रों की कुछ मांगें हैं और उन्होंने पुणे में आंदोलन शुरू किया है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार और शिक्षण संस्थानों को स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और समाधान खोजने के लिए कदम उठाने चाहिए।” एमपीएससी से जुड़े मुद्दों को लेकर पुणे में पिछले कुछ दिनों से अभ्यर्थियों के अलग-अलग समूह प्रदर्शन कर रहे हैं। अभ्यर्थियों की मांगों में परीक्षा प्रणाली, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, रिक्त पदों पर भर्ती और आयोग के कामकाज से जुड़े विषय शामिल हैं। एक समूह एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार को हटाने की मांग कर रहा है। इसके अलावा करीब 70 हजार रिक्त पदों पर भर्ती, परीक्षाओं को ऑफलाइन आयोजित करने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जैसी मांगें भी सामने रखी गई हैं।
हालांकि आंदोलन में शामिल सभी अभ्यर्थियों की मांगें एक जैसी नहीं हैं। पुणे में अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे समूह परीक्षा के पैटर्न को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं। एक समूह वस्तुनिष्ठ यानी MCQ आधारित परीक्षा प्रणाली की वापसी चाहता है, जबकि दूसरा समूह 2025 में लागू की गई वर्णनात्मक परीक्षा प्रणाली को जारी रखने की मांग कर रहा है। वर्णनात्मक परीक्षा प्रणाली का समर्थन करने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से इसी पैटर्न के आधार पर तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में अचानक परीक्षा प्रणाली में बदलाव किए जाने से उनकी तैयारी प्रभावित हो सकती है। दूसरी तरफ MCQ प्रणाली की मांग करने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था को लागू करने में व्यावहारिक समस्याएं सामने आई हैं।
इस बीच एमपीएससी अध्यक्ष को हटाने की मांग को लेकर भी आंदोलन जारी है। एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार आंदोलन से जुड़े हुए हैं और उन्होंने आयोग के अध्यक्ष को हटाने सहित अभ्यर्थियों की विभिन्न मांगों का समर्थन किया है। आंदोलन के दौरान कई राजनीतिक नेताओं ने भी प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से मुलाकात की है। शरद पवार ने इस पूरे घटनाक्रम के बीच संवाद को सबसे महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी इस मुद्दे को लेकर फोन पर बात की। पवार के मुताबिक उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि मुंबई लौटने के बाद वे मामले पर ध्यान दें और छात्रों से बातचीत करें। उन्होंने जरूरत पड़ने पर अभ्यर्थियों के साथ बैठक करने की बात भी कही।
इससे पहले 30 सितंबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एमपीएससी अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक हुई थी। बैठक के बाद सरकार ने परीक्षाओं को ऑफलाइन आयोजित करने, भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और सिंगल कार्ड व्यवस्था जैसे कदमों का आश्वासन दिया था। इसके बाद 2 अक्टूबर को प्रस्तावित एक आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित भी किया गया था। इसी घटनाक्रम के बीच एमपीएससी सचिव महेंद्र हरपालकर का तबादला भी किया गया। हालांकि अध्यक्ष को हटाने की मांग पर गतिरोध बना हुआ है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा है कि एमपीएससी अध्यक्ष संवैधानिक पद पर हैं और उन्हें हटाने की प्रक्रिया राज्य सरकार के सीधे अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। पुणे में जारी आंदोलन अब केवल एक मांग तक सीमित नहीं है। अलग-अलग समूह परीक्षा प्रणाली और आयोग से जुड़े अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे एमपीएससी की परीक्षा और भर्ती व्यवस्था को लेकर अभ्यर्थियों के बीच मौजूद चिंताएं खुलकर सामने आई हैं। सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा कार्यक्रम, भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा पैटर्न में स्थिरता महत्वपूर्ण होती है। बार-बार बदलाव या भर्ती प्रक्रिया में देरी होने पर उनकी तैयारी और भविष्य की योजना प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी स्पष्ट और स्थायी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। महाराष्ट्र में एमपीएससी राज्य सरकार के विभिन्न प्रशासनिक पदों पर भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करता है। बड़ी संख्या में युवा हर वर्ष इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में आयोग से जुड़ा कोई भी विवाद या परीक्षा प्रणाली में बदलाव सीधे हजारों अभ्यर्थियों को प्रभावित करता है। शरद पवार का कहना है कि सरकार और संबंधित संस्थानों को छात्रों की बेचैनी को समझना चाहिए। उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर है कि आंदोलन को लंबा खींचने के बजाय दोनों पक्षों के बीच बातचीत हो और ऐसा रास्ता निकाला जाए जिससे छात्रों की शिकायतों का समाधान हो सके। एमपीएससी आंदोलन में राजनीतिक नेताओं की भागीदारी भी बढ़ी है। अलग-अलग दलों के नेताओं ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की है और उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की बात कही है। हालांकि अभ्यर्थियों के अलग-अलग समूहों की मांगों में अंतर होने के कारण समाधान निकालना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल पुणे में आंदोलन जारी रहने के बीच अब नजर राज्य सरकार और एमपीएससी प्रशासन के अगले कदम पर है। शरद पवार ने सरकार से छात्रों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की अपील करते हुए कहा है कि बातचीत के माध्यम से गतिरोध दूर किया जाना चाहिए। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के बीच होने वाली बातचीत इस आंदोलन की आगे की दिशा तय कर सकती है।