राजस्थान : जोधपुर में मेयर की कुर्सी पर किसकी होगी ताजपोशी? 51 के आंकड़े पर पेंच...
राजस्थान : राजस्थान के दूसरे बड़े शहर जोधपुर नगर निगम में महापौर की कुर्सी के लिए मतदान जारी है. चुनाव को लेकर प्रशासन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. 100 सदस्यीय नगर निगम में बहुमत के लिए 51 वोट जरूरी हैं. यही 51 का आंकड़ा बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबले को दिलचस्प बना रहा है. मतदान के बाद ही साफ होगा कि जोधपुर के मेयर की कुर्सी बीजेपी के प्रसन्नचंद मेहता संभालेंगे या कांग्रेस के राजेंद्र सोलंकी.
जोधपुर नगर निगम चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो बीजेपी के पास 45 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के 44 पार्षद हैं. इसके अलावा 10 निर्दलीय और आरएलपी का एक पार्षद है. यानी बीजेपी और कांग्रेस के बीच सिर्फ एक सीट का अंतर है. ऐसे में बहुमत के लिए दोनों पार्टियों को निर्दलीय पार्षदों और आरएलपी के समर्थन की जरूरत पड़ रही है.
इसी वजह से पिछले कुछ दिनों से दोनों खेमों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं. पार्षदों की बाड़ेबंदी से लेकर समर्थन जुटाने तक, दोनों दल अपने-अपने स्तर पर पूरी कोशिश कर रहे हैं. अब सबकी नजर उन पार्षदों पर है, जिनके वोट से मेयर चुनाव का समीकरण बदल सकता है.
बीजेपी ने वार्ड 82 से निर्वाचित वरिष्ठ नेता प्रसन्नचंद मेहता को महापौर पद का उम्मीदवार बनाया है. मेहता लंबे समय से पार्टी संगठन से जुड़े रहे हैं और अलग-अलग संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं. नामांकन के बाद बीजेपी ने अपने समर्थन का आंकड़ा जुटाने पर जोर दिया है. पार्टी की ओर से सात निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया गया है. अगर यह दावा मतदान में भी कायम रहता है तो बीजेपी के 45 पार्षदों के साथ सात निर्दलीय पार्षद जुड़कर संख्या 52 तक पहुंच जाती है. यानी पार्टी बहुमत के आंकड़े 51 से एक वोट आगे हो सकती है. हालांकि चुनाव में दावे और मतदान का अंतिम नतीजा अलग हो सकता है. क्रॉस वोटिंग की संभावना के बीच बीजेपी और कांग्रेस दोनों अपने पार्षदों को लेकर सतर्क हैं.
कांग्रेस ने पूर्व जेडीए अध्यक्ष राजेंद्र सोलंकी को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया है. सोलंकी ने इस बार पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था. उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी नेताओं में गिना जाता है. वे पहले जेडीए अध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. कांग्रेस के पास 44 पार्षद हैं. ऐसे में उसे बहुमत के 51 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए कम से कम सात अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी. यही वजह है कि कांग्रेस की नजर निर्दलीय पार्षदों और आरएलपी के एक पार्षद के समर्थन पर टिकी हुई है.
बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबले में 10 निर्दलीय और आरएलपी का एक पार्षद यानी कुल 11 पार्षद अहम भूमिका में हैं. बीजेपी की ओर से सात निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया गया है, जबकि कांग्रेस खेमे के साथ चार पार्षदों के होने की चर्चा है. ऐसे में इन 11 पार्षदों के वोट को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मतदान के दौरान अगर किसी भी खेमे में क्रॉस वोटिंग होती है तो पूरे समीकरण बदल सकते हैं. इसलिए दोनों प्रमुख दल अपने-अपने पार्षदों के साथ-साथ निर्दलीयों के समर्थन को लेकर भी पूरी तरह सतर्क हैं.
जोधपुर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का गृह जिला है. ऐसे में नगर निगम का यह चुनाव बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अब अंतिम फैसला 25 सितंबर को होने वाले मतदान में होगा. बहुमत के लिए जरूरी 51 वोट किसे मिलते हैं और निर्दलीय व आरएलपी के पार्षद किस तरफ जाते हैं, यही तय करेगा कि जोधपुर नगर निगम की मेयर की कुर्सी पर प्रसन्नचंद मेहता बैठेंगे या राजेंद्र सोलंकी.