मुंबई: बाजार से पनीर खरीदने से पहले ऐसे करें असली नकली की पहचान
मुंबई: पनीर भारतीय खानपान का अहम हिस्सा है। घरों से लेकर होटल और रेस्टोरेंट तक इसकी मांग बनी रहती है। त्योहारों और शादी-विवाह के सीजन में इसकी खपत और बढ़ जाती है। ऐसे में बाजार में बिकने वाले पनीर की गुणवत्ता और शुद्धता को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी है। खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के मुताबिक उपभोक्ताओं को पनीर खरीदते समय विक्रेता और उत्पाद से संबंधित जरूरी जानकारी की जांच करनी चाहिए। खासकर पैक्ड पनीर खरीदते समय एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और लेबल पर दी गई जानकारियों को ध्यान से देखना चाहिए।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सीधे लोगों की सेहत से जुड़ी होती है। पनीर दूध से तैयार होने वाला उत्पाद है और इसे सही तापमान पर रखना जरूरी होता है। भंडारण या परिवहन में लापरवाही होने पर इसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए केवल पनीर का रंग और आकार देखकर उसकी गुणवत्ता का अंदाजा लगाना पर्याप्त नहीं है। उपभोक्ताओं को खरीदारी के दौरान पैकेजिंग, निर्माण की तारीख, उपयोग की अंतिम तारीख और निर्माता से जुड़ी जानकारी भी देखनी चाहिए।
पैक्ड पनीर खरीदने वालों को सबसे पहले पैकेट पर एफएसएसएआई से संबंधित विवरण देखना चाहिए। इसके साथ ही पैकेट पर निर्माता या पैकर का नाम और पता, बैच या लॉट नंबर, निर्माण या पैकिंग की तारीख और उपयोग की अवधि जैसी जानकारियों को पढ़ना जरूरी है। यदि पैकेट फटा हुआ हो, सील टूटी हो या उस पर जरूरी जानकारी स्पष्ट न हो तो ऐसे उत्पाद को खरीदने से बचना बेहतर है। खुले में बिकने वाले पनीर को खरीदते समय भी सावधानी जरूरी है। उपभोक्ता यह देख सकते हैं कि दुकान में पनीर को किस तरह रखा गया है। यदि पनीर लंबे समय तक खुले में पड़ा हो या उसके आसपास साफ-सफाई की स्थिति ठीक न हो तो उसे खरीदने से बचा जा सकता है। दूध से बने उत्पाद जल्दी खराब हो सकते हैं, इसलिए इनके रखरखाव में स्वच्छता और उचित तापमान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पनीर की ताजगी का भी ध्यान रखना चाहिए। असामान्य गंध, रंग में बदलाव या बनावट में स्पष्ट अंतर दिखाई देने पर सतर्क होना जरूरी है। हालांकि केवल देखकर किसी खाद्य पदार्थ को मिलावटी घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच और अधिकृत प्रयोगशाला परीक्षण की आवश्यकता होती है। इसलिए किसी उत्पाद पर संदेह होने की स्थिति में स्वयं निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को जानकारी देना उचित है।