रेल नीर की गुणवत्ता पर विवाद, आईआरसीटीसी ने इन्फ्लुएंसर के खिलाफ शुरू की कानूनी कार्रवाई
मुंबई: इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन ने अपने पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर ब्रांड ‘रेल नीर’ को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए एक दावे के बाद कानूनी कदम उठाया है। आईआरसीटीसी ने एक इन्फ्लुएंसर के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, जिसने दावा किया था कि ‘रेल नीर’ के एक सैंपल में ब्रोमेट की मात्रा तय सीमा से कई गुना अधिक पाई गई है। आईआरसीटीसी के अनुसार, यह कार्रवाई उसके कानूनी विभाग के माध्यम से शुरू की गई है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए एक वकील भी नियुक्त किया गया है। कंपनी का कहना है कि सोशल मीडिया पर किए गए दावे से ब्रांड की छवि और यात्रियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए मामले को गंभीरता से लिया गया है।
यह पूरा विवाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर किए गए एक दावे के बाद शुरू हुआ। ‘ट्रस्टीफाइड’ नाम के यूट्यूब चैनल ने एक वीडियो और लैब टेस्ट रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया था कि ‘रेल नीर’ के एक सैंपल में ब्रोमेट की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। चैनल की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, लैब टेस्ट में रेल नीर के एक सैंपल में 0.084 मिलीग्राम प्रति लीटर यानी 84 माइक्रोग्राम प्रति लीटर ब्रोमेट पाया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर के लिए ब्रोमेट की निर्धारित सीमा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर यानी 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर है।
टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर चैनल ने दावा किया कि सैंपल में ब्रोमेट की मात्रा तय सीमा से लगभग 8.4 गुना अधिक थी। इस दावे के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और रेलवे यात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले पैकेज्ड पानी की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे। रेल नीर भारतीय रेलवे का प्रमुख पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर ब्रांड है, जिसे यात्रियों को रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में उपलब्ध कराया जाता है। बड़ी संख्या में यात्री रोजाना रेल नीर का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए इसकी गुणवत्ता से जुड़ा कोई भी दावा सीधे यात्रियों की चिंता से जुड़ जाता है।
आईआरसीटीसी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया। कंपनी का कहना है कि किसी भी उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर किए गए दावों की जांच जरूरी है और बिना पर्याप्त आधिकारिक पुष्टि के ऐसे दावे जनता में भ्रम पैदा कर सकते हैं। कंपनी की ओर से उठाए गए इस कदम के बाद अब यह मामला कानूनी जांच के दायरे में आ गया है। आईआरसीटीसी यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि सोशल मीडिया पर किए गए दावे कितने प्रमाणिक हैं और जिस लैब रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, उसकी विश्वसनीयता क्या है।
विशेषज्ञों के अनुसार, खाद्य और पेय पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह की रिपोर्ट सामने आने पर वैज्ञानिक जांच और आधिकारिक प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी उत्पाद की सुरक्षा को लेकर अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एजेंसियों और मान्यता प्राप्त परीक्षण प्रक्रियाओं के आधार पर ही निकाला जा सकता है। रेलवे यात्रियों के लिए पेयजल की गुणवत्ता एक अहम विषय है। रेलवे और उससे जुड़े संस्थान समय-समय पर अपने उत्पादों की गुणवत्ता जांच और निगरानी करते रहते हैं। ऐसे में रेल नीर को लेकर सामने आए इस विवाद के बाद गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया पर भी चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल आईआरसीटीसी की ओर से कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। वहीं, सोशल मीडिया पर दावा करने वाले पक्ष की ओर से सामने रखी गई लैब रिपोर्ट और उसके आधार पर किए गए दावों की भी जांच की जाएगी। मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, यह जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल रेल नीर की गुणवत्ता को लेकर उठा विवाद यात्रियों, रेलवे और सोशल मीडिया जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।