मुंबई: बोरीवली आरटीओ के पुराने रिकॉर्ड नष्ट नहीं करने का आरोप
मुंबई: मुंबई पुलिस ने बोरीवली रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस के एक्सपायर हो चुके रिकॉर्ड्स के निपटान में कथित लापरवाही को लेकर विदिषा कॉर्पोरेशन के मालिक विशाल शिंदे (39) के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि कंपनी ने आरटीओ के पुराने दस्तावेजों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नष्ट नहीं किया, न ही रिकॉर्ड्स के निपटान का प्रमाण पत्र जमा किया और न ही इस संबंध में विभाग को कोई जानकारी उपलब्ध कराई। यह मामला मुंबई के एमएचबी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, बोरीवली आरटीओ में तैनात असिस्टेंट मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर सतीश सोनावणे की शिकायत के आधार पर 30 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी विशाल शिंदे को नोटिस जारी किया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, बोरीवली आरटीओ ने पुराने और उपयोग से बाहर हो चुके रिकॉर्ड्स के निपटान के लिए परिवहन विभाग के नियमों के तहत प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के निर्देशों और विभागीय गाइडलाइंस के अनुसार 1 अप्रैल, 2025 को एक टेंडर जारी किया गया था। इस टेंडर के जरिए रिकॉर्ड्स को निर्धारित तरीके से नष्ट करने और संबंधित प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी दी जानी थी। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया के तहत जिम्मेदारी मिलने के बाद भी विदिषा कॉर्पोरेशन ने रिकॉर्ड्स के निपटान से जुड़ी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं कीं। नियमों के अनुसार पुराने दस्तावेजों को नष्ट करने के बाद संबंधित प्रमाण पत्र जमा करना और पूरी प्रक्रिया की जानकारी विभाग को देना जरूरी होता है। लेकिन शिकायत के मुताबिक, कंपनी की ओर से ऐसा नहीं किया गया।
आरटीओ जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में बड़ी संख्या में वाहन पंजीकरण, लाइसेंस, परमिट और अन्य प्रशासनिक रिकॉर्ड रखे जाते हैं। समय सीमा पूरी होने के बाद इन दस्तावेजों का सुरक्षित तरीके से निपटान करना आवश्यक होता है, ताकि रिकॉर्ड प्रबंधन व्यवस्थित रहे और संवेदनशील जानकारी के गलत इस्तेमाल की संभावना कम हो सके। परिवहन विभाग की गाइडलाइंस के अनुसार, पुराने रिकॉर्ड्स को नष्ट करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना जरूरी होता है। दस्तावेजों के निपटान के बाद संबंधित एजेंसी को यह प्रमाणित करना होता है कि रिकॉर्ड्स को नियमों के अनुसार नष्ट कर दिया गया है। ऐसा नहीं होने पर विभागीय नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि रिकॉर्ड्स का वास्तव में क्या हुआ, क्या उन्हें नष्ट किया गया था या नहीं, और यदि प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है। पुलिस संबंधित दस्तावेजों और टेंडर से जुड़े रिकॉर्ड्स की भी जांच कर सकती है। इस मामले ने सरकारी रिकॉर्ड्स के प्रबंधन और निपटान प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी विभागों के पुराने दस्तावेजों को संभालना एक संवेदनशील प्रक्रिया होती है, क्योंकि इनमें नागरिकों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां होती हैं। ऐसे में रिकॉर्ड्स के निपटान में किसी भी तरह की लापरवाही सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर मानी जाती है।