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मुंबई : राज्य में सूचना का अधिकार अधिनियम से जुड़े हाल ही में किए गए विवादास्पद संशोधनों पर राज्य सरकार ने फिलहाल रोक लगा दी है। यह फैसला वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के विरोध और आंदोलन के बाद लिया गया है। मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हस्तक्षेप के बाद राज्य सूचना आयोग ने संशोधनों को स्थगित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री का सीधा हस्तक्षेप अन्ना हजारे द्वारा RTI संशोधनों के खिलाफ आंदोलन और अनशन की चेतावनी के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे में सीधा हस्तक्षेप किया। उन्होंने राज्य सूचना आयोग को पत्र भेजकर कहा कि “वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के साथ विस्तृत चर्चा किए बिना सूचना के अधिकार में कोई बदलाव उचित नहीं होगा।” मुख्यमंत्री के इस हस्तक्षेप के बाद मुख्य सूचना आयुक्त ने 12 जून को राजपत्र में प्रकाशित सभी संशोधनों को फिलहाल स्थगित कर दिया। इस फैसले को RTI कार्यकर्ताओं और अन्ना हजारे के आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है।

अन्ना हजारे का विरोध अन्ना हजारे ने इन संशोधनों को लेकर सरकार के खिलाफ अनशन की चेतावनी दी थी। उनका कहना था कि सूचना का अधिकार आम जनता का मौलिक अधिकार है और इसे कमाई का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ लोग इसका दुरुपयोग करते हैं, लेकिन इसके नाम पर आम नागरिकों के अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता। सामाजिक संगठनों ने भी इन बदलावों का विरोध किया था और इसे आम नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करना कठिन बनाने वाला कदम बताया था।

RTI में प्रस्तावित प्रमुख बदलाव राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधनों में कई अहम बदलाव शामिल थे, जिनमें आवेदन शुल्क बढ़ाना और प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाना प्रमुख था। आवेदन शुल्क 10 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये किया गया था प्रति पृष्ठ सूचना शुल्क 2 रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये किया गया था प्रथम अपील के लिए 50 रुपये शुल्क तय किया गया था द्वितीय अपील के लिए 100 रुपये शुल्क प्रस्तावित था एक आवेदन में केवल एक ही विषय रखने की शर्त

आवेदन को 150 शब्दों तक सीमित करना फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करना बार-बार समान RTI आवेदनों को खारिज करने का प्रावधान वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के लिए आवेदन अस्वीकार करने का नियम व्यक्तिगत जानकारी के लिए “बड़े सार्वजनिक हित” का प्रमाण आवश्यक ऑनलाइन, ई-मेल और UPI भुगतान को मान्यता देना बार-बार अनुपस्थित रहने पर अपील खारिज करने का प्रावधान कुल मिलाकर 12 नए नियम लागू किए जाने की तैयारी थी। सामाजिक संगठनों की चिंता

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना था कि इन संशोधनों से आम नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करना कठिन हो जाएगा। RTI के मूल उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही को कमजोर करने की आशंका जताई जा रही थी। फिलहाल संशोधन स्थगित सरकार के फैसले के बाद अब इन सभी संशोधनों को फिलहाल रोक दिया गया है। माना जा रहा है कि आगे अन्ना हजारे और सरकार के बीच चर्चा के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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