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ठाणे : जिले की एक अदालत ने वर्ष 2008 में रेलवे भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों पर हमले से जुड़े मामले में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे समेत अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने 21 मई को पारित आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि ठाकरे घटनास्थल पर मौजूद थे या उन्होंने हमले के लिए उकसाया था। कोर्ट ने कहा कि मनसे प्रमुख के कथित भाषण वाली सीडी न तो अदालत में पेश की गई और न ही उसे सही साबित किया गया।

अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी ने स्वीकार किया है कि यह सीडी 2013 से 2026 तक पुलिस थाने में धूल फांकती रही, जिससे उसका कोई साक्ष्यात्मक महत्व नहीं रह गया। रविवार को उपलब्ध कराई गई आदेश की प्रति के मुताबिक, अदालत ने यह भी कहा कि जिरह के दौरान यह स्वीकार किया गया कि गवाहों को लगी चोटें भारी भीड़ में अफरा-तफरी से मची भगदड़ के कारण भी हो सकती थीं। ठाणे के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिजीत वी कुलकर्णी ने 14 साल पुराने मामले में राज ठाकरे (57) और पांच अन्य आरोपियों-आकाश राजेंद्र काले, संतोष निवृत्ति ठाकरे, विशाल सुरेश कांबले, कैलाश प्रकाश चौबे और गणेश प्रकाश चौबे को बरी कर दिया।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा। यह मामला 17-18 अक्टूबर 2008 की दरमियान रात की एक घटना से संबंधित है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, शिकायतकर्ता-मध्य प्रदेश निवासी हरिनारायण श्रीचक्कीलाल अहिरवार माल रक्षक के पद के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से आयोजित लिखित परीक्षा में शामिल होने के लिए ठाणे के कल्याण रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। जब उत्तर प्रदेश और बिहार सहित अन्य राज्यों से आए अभ्यर्थी स्टेशन के बुकिंग हॉल में आराम कर रहे थे, तभी लाठियों से लैस आठ से दस लोग कथित तौर पर अंदर घुस आए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हमलावरों ने ‘मनसे जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए अभ्यर्थियों से उनके गृह राज्य के बारे में पूछा और उनकी पिटाई करते हुए लौटने के लिए कहा।


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