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मुंबई : महानगर में अप्रैल के बचे हुए दिनों में मौसम का मिजाज गर्म और उमस भरा रहने वाला है। दिन का अधिकतम तापमान लगभग 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहेगा, जबकि कुछ दिनों में इसमें हल्का उतार-चढ़ाव संभव है। मौसम वैज्ञानिक और विशेषज्ञ के अनुसार, तापमान बहुत ज्यादा नहीं बढ़ेगा, लेकिन बढ़ती उमस (ह्यूमिडिटी) लोगों की परेशानी बढ़ाएगी। अप्रैल महीने की शुरुआत में वेस्टर्न डिस्ट्बेंस आने और पश्चिमी हवा सक्रिय होने के कारण शुरुआती 10 दिन मुंबईकरों के लिए आरामदायक थे, लेकिन अब पिछले 3 दिनों में मौसम से करवट ली है। 

क्षेत्रीय मौसम विभाग की वैज्ञानिक सुषमा नायर ने बताया, राज्य के ऊपर एक एंटी साइक्लोन एक्टिव होने के कारण मंगलवार को अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, बुधवार को इसमें थोड़ी गिरावट हुई और पारा 34.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि, उमस 46% रहने से लोगों को काफी परेशानी हुई।

ह्यूमिडिटी 60 पर्सेंट तक

मौसम विशेषज्ञ अथ्रेया शेट्टी ने बताया, दिन के समय ह्यूमिडिटी करीब 50- 60% के आसपास रह सकती है, जबकि रात में यह 70-80% तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे में मुंबई को रात में भी चिपचिपी गर्मी से राहत मिलने के आसार कम है। रात में पारा 24-25 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहेगा और नमी 70-80% के इर्द गिर्द रहने की उम्मीद है। 

19-23 अप्रैल के बीच पड़ सकती है हल्की फुआरे

अश्रेया ने बताया, 19 अप्रैल के बाद से पश्चिमी हवाओं के सक्रिय होने की संभावना है, जिसके चलते मध्य महाराष्ट्र और आंतरिक इलाकों में प्री- मॉनसून बारिश शुरू हो सकती है। इस दौरान मुंबई में भी 19-23 अप्रैल के बीच हल्की बारिश या बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। हालांकि, इस बारिश से तापमान में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। उल्टा, बारिश के बाद उमस और बढ़ सकती है, जिससे गर्मी का अहसास और ज्यादा तीखा हो सकता है। कुल मिलाकर, अप्रैल के अंत तक मुंबईकरों को तेज धूप से ज्यादा उमस भरी गर्मी से जूझना पड़ेगा, और ठंडी रातों की राहत फिलहाल दूर ही नजर आ रही है। 

2 हवाओं के मिलने से होगी बारिश

मौसम वैज्ञानिक सुषमा नायर ने बताया, 21-22 अप्रैल के दौरान बनने वाली बारिश की स्थिति को 'लाइन ऑफ डिस्कॉन्टिन्यूटी' कहा जाता है। इसका मतलब है 2 अलग तरह की हवाओ का मिलना है। एक तरफ उत्तर पूर्व से आने वाली सूखी हवाएं और दूसरी तरफ से समुद्र से आने वाली नमी वाली हवाएं। जब ये दोनों हवाएं आपस में टकराती है, तो वातावरण मे अस्थिरता बढ़ती है। अगर पहले से तापमान ज्यादा हो, तो यह स्थिति थंडर एक्टिविटी के साथ हल्की बारिश में बदल सकती है।

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