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मुंबई - राज्य के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मौत के कुछ ही घंटों में मंत्रालय में फाइलें तेज़ी से सर्कुलेट होने लगीं। इसमें करीब 20 संगठनों की 75 फाइलें शामिल थीं। स्कूलों को माइनॉरिटी का दर्जा देने का फैसला लिया गया। माइनॉरिटी डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की तरफ से स्कूलों को माइनॉरिटी स्टेटस सर्टिफिकेट देने का काम था। अजीत पवार की मौत के दिन और उसके कुछ घंटों बाद तक मंत्रालय के अधिकारियों ने यह काम किया है। गौरतलब है कि 12 अक्टूबर 2025 को पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे ने सर्टिफिकेट बांटने का काम रोक दिया था। उसके बाद कोकाटे के इस्तीफे के बाद यह विभाग अजीत पवार के पास था।

इस बारे में राज्य यूथ कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी अक्षय जैन ने कहा कि 28 दिसंबर को जिस दिन अजीत पवार का निधन हुआ था। उसके बाद अचानक अधिकारियों ने 28 से 30 दिसंबर तक राज्य के 20 संस्थानों के 75 स्कूलों में शाम 6.30 बजे, शाम 7 बजे और रात 8 बजे सर्टिफिकेट बांटने का फैसला किया। ये सर्टिफिकेट 3 महीने पहले रोक दिए गए थे। इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस डिपार्टमेंट के मंत्रियों का निधन हो गया था, तब अधिकारी बेशर्म थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जब यह एक सेंसिटिव मामला था, तो अधिकारियों ने यह काम करने में जल्दबाजी क्यों की। 


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