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भिवंडी  : महाराष्ट्र के भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका में समाजवादी पार्टी (सपा) ने बड़ा दांव चलकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सारे समीकरण बिगाड़ दिए हैं। भिवंडी-निजामपुर शहर नगर निगम में मेयर पद की कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान के बीच सपा विधायक रईस शेख ने कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) के साथ मिलकर 'भिवंडी सेक्युलर फ्रंट' के गठन का ऐलान कर दिया है। इस मास्टरस्ट्रोक के जरिए अखिलेश यादव की पार्टी ने भिवंडी में न केवल अपनी ताकत दिखाई है, बल्कि भाजपा को मेयर पद की रेस से लगभग बाहर कर दिया है। 

सपा, कांग्रेस और शरद गुट की तिगड़ी ने पलटी बाजी

भिवंडी पूर्व से सपा विधायक रईस शेख के नेतृत्व में बने इस फ्रंट ने बहुमत के जादुई आंकड़े को आसानी से पार कर लिया है। 90 सदस्यों वाली नगर निगम में मेयर बनने के लिए 46 पार्षदों की जरूरत है, जबकि इस नए गठबंधन के पास 48 पार्षद है। 

किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण भिवंडी-निजामपुर शहर नगर निगम में त्रिशंकु स्थिति बन गई है। इसी बीच सत्ता गठन को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया।

15 जनवरी को हुए चुनाव में 90 सीटों में से कांग्रेस ने सबसे अधिक 30 सीटें जीती हैं, जबकि एनसीपी (शरद पवार गुट) को 12 सीटों पर जीत मिली है। इस तरह इन दोनों के पास कुल 42 सीटें हैं। वहीं भाजपा ने 22 और शिवसेना (एकनाथ शिंदे) ने 12 सीटें हासिल की हैं। भाजपा-शिवसेना महायुति के पास मिलाकर 34 सीटें हैं। जबकि सपा के 6 पार्षद निर्वाचित हुए और सपा किंगमेकर की भूमिका में आ गई है।   

सपा के प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी की हरी झंडी के बाद शुरू हुई बातचीत सफल रही और 'भिवंडी सेक्युलर फ्रंट' के गठन से भाजपा गठबंधन को तगड़ा झटका लगा है। सपा विधायक रईस शेख ने स्पष्ट कहा, "भिवंडी की जनता ने सेक्युलर ताकतों को जनादेश दिया है। अब इस निगम का अगला मेयर 'भिवंडी सेक्युलर फ्रंट' से ही होगा। भिवंडी के नागरिकों ने हम पर जो भरोसा जताया है, उस पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे।"

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