मुंबई : आर्थिक संकट के जाल में फंसी ‘लालपरी’
मुंबई : कोरोना महामारी में लॉकडाउन का गंभीर असर एसटी और उसके कर्मचारियों पर पड़ा है. पिछले 4 माह से यातायात लगभग बंद होने से राज्य की लालपरी कही जाने वाली एसटी गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही है, इसका असर कर्मचारियों पर भी पड़ा है. कर्मचारियों को 2 माह से वेतन नहीं मिल रहा है. सैकड़ों कर्मचारी तो कोरोना संक्रमण से जूझ रहे हैं.अब राज्य सरकार से वेतन, डीजल के पैसों की मांग की गई है. परिवहन मंत्री अनिल परब ने कहा कि राज्य सरकार भी इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही है.इस समय एसटी को भी मदद की जरूरत है.सरकार से मदद के लिए कहा गया है.
लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों को राज्य की सीमा पर छोड़े जाने की एवज में एसटी का राज्य सरकार पर लगभग 95 करोड़ रुपए बकाया है.राज्य के मदद व पुनर्वास विभाग से यह रकम एसटी के लिए मांगी गई है. महाराष्ट्र एसटी वर्कर्स कांग्रेस (इंटक) संगठन के अध्यक्ष व पूर्व विधायक जयप्रकाश छाजेड के अनुसार इस रकम के अलावा पुलिस वारंट, कारागृह वारंट, चुनाव आदि के लिए एस.टी. बस के खर्च के रूप में सरकार की तरफ से 147 करोड़ रुपए आने हैं. इसके अलावा विभिन्न यात्रा छूट के एवज में 27 करोड़ आने हैं.इस तरह महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कुल लगभग 279 करोड़ रुपए आने बाकी हैं.यह रकम तत्काल मिलनी चाहिए.
यूनियन के महासचिव मुकेश तिगोटे के अनुसार 23 मार्च से एसटी सेवा बंद किए जाने पर रोजाना 22 करोड़ का नुकसान हो रहा है.लॉकडाउन की वजह से 4 माह में एसटी का 2500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है. इस परिस्थिति में एसटी कर्मचारियों को वेतन भी नहीं मिल रहा है. मई माह का मात्र 50 प्रतिशत वेतन दिया गया. जून का वेतन नहीं मिला है. ट्रेनी-प्रतीक्षारत हजारों कर्मचारियों को तो घर बिठा दिया गया है.
जयप्रकाश छाजेड़ ने कहा कि इस कठिन परिस्थिति से एसटी को उबारने के लिए तत्काल एक हजार करोड़ अनुदान की जरूरत है.वेतन न मिलने से एसटी कर्मचारियों व उनके परिवार पर बड़ा संकट आ गया है.बताया गया है,कि गुजरात, कर्नाटक,आंधप्रदेश,तेलंगना सहित कई राज्यों ने अपने राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों के वेतन के लिए आर्थिक सहायता दी है.उसी प्रकार महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों को वेतन के लिए 500 करोड़ की तत्काल सहायता मिलनी चाहिए. इसके लिए राज्य के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, राज्य मंत्री, परिवहन मंत्री को महाराष्ट्र एसटी वर्कर्स कांग्रेस (इंटक) ने पत्र देकर निवेदन किया है.