Latest News

मुंबई : दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र में आने वाले प्रवासी मजदूरों के नियमन और पंजीयन की प्रक्रिया तय करने के लिए महाराष्ट्र सरकार में हलचल शुरू हो गई है। इस बारे में एक राज्यव्यापी नीति तय करने के लिए विचार-विमर्श चल रहा है। इसकी पुष्टि करते हुए राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि इस बारे में जो भी फैसला लिया जाएगा, वह मंत्रिमंडल लेगा। देशमुख ने कहा कि कोरोना संकट को देखते हुए जब देश में लॉकडाउन का निर्णय लिया गया तो देशभर में प्रवासी मजदूरों की बड़ी समस्या पैदा हो गई। जीवनयापन के लिए गांव से शहरों में आए लाखों मजदूर लॉकडाउन की वजह से बेरोजगार हो गए। एक तरफ कोरोना का संकट दूसरी तरफ बेरोजगार मजदूरों को वापस उनके गांव भेजने की समस्या से सरकारों को एक बड़ी चुनौती से जूझना पड़ा है। भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए सरकार को इस बारे में ठोस नीति बनानी होगी। गौर करने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र की महा विकास आघाड़ी सरकार से मजदूरों का रजिस्ट्रेशन कराने की मांग सबसे पहले एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने की थी। राज ठाकरे ने सरकार से कहा था कि लॉकडाउन की वजह से यहां से पलायन करने वाले प्रवासी मजदूर उद्योग धंधे शुरू होते ही रोजगार के लिए वापस लौटेंगे।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि वापस लौटने वाले मजदूरों का माइग्रेंट वर्कर्स ऐक्ट के तहत पंजीकरण किया जाना चाहिए। लगता है उद्धव ठाकरे सरकार ने राज ठाकरे की इस मांग को गंभीरता से लिया है। बता दें कि प्रवासी मजदूरों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्रवासी मजदूरों को 15 दिन के भीतर उनके गांव भेजने का निर्देश केंद्र सरकार को दिया है और राज्य सरकारों से यह पूछा है कि वापस आने वाले मजदूरों को वह किस तरह से रोजगार उपलब्ध कराएंगे। कोर्ट ने राज्य सरकारों से इसका ब्योरा पेश करने को भी कहा है। इस केस में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार (9 जून) को अपना फैसला सुना सकता है।


Weather Forecast

Advertisement

Live Cricket Score

Stock Market | Sensex

Advertisement