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मुंबई : दिल्ली से मुंबई के बीच दौड़ने वाली राजधानी एक्सप्रेस में सफर आने वाले समय में और छोटा हो जाएगा। रेलवे के इन्फ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर कर 2023 तक इसके ट्रैवल टाइम को 5 घंटे 45 मिनट कम करने की योजना है। फिलहाल, इस सफर में 15 घंटे 45 मिनट लगते हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर के लचर होने के कारण यह ट्रेन अपनी क्षमता के मुताबिक स्पीड नहीं पकड़ पा रही थी। 

राजधानी एक्सप्रेस के सभी रेक जर्मनी की सुपीरियर लिंक हॉफमन बश टेक्नॉलजी से बने होते हैं और यह 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकती है लेकिन इसको सपॉर्ट करने वाला इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर नहीं होने के कारण यह 87 किमी प्रति घंटा की स्पीड पर सीमित थी। रेलवे के एक विश्लेषण से पता लगा है कि कुल 60,000 किमी के नेटवर्क में से सिर्फ 0.3 प्रतिशत 160 प्रति घंटा की रफ्तार को झेल सकता है जबकि 5 प्रतिशत 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार का भार उठा सकता है। 

गौरतलब है कि रेलवे के 2016-17 बजट में ही मिशन रफ्तार के नाम से रेलवे के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बदलने का प्लान बनाया गया था और मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में इस पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि रूट की क्षमता 20 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल, हर दिन यह सेक्टर 100 पैसेंजर और 80 गुड्स ट्रेनें हैंडल करता है। 

रेलवे के एक अधिकारी ने बताया, 'दिल्ली-मुंबई सेक्टर में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात भी आता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर होने से सातों राज्यों के यात्रियों को सुविधा होगी।' रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य सुबोध जैन ने बताया है कि प्रॉजेक्ट के पूरा होने के बाद फ्लाइट्स से सफर करने वाले 25 प्रतिशत लोग राजधानी को ही प्राथमिकता देंगे क्योंकि इसके जरिए वह पूरे समय इंटरनेट से कनेक्टेड रह सकेंगे। 

अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली और मुंबई के बीच भारत की पहली बिना इंजन वाली सेमी-हाई स्पीड ट्रेन 18 और उसके बाद 2022 तक आने के लिए प्रस्तावित ट्रेन 20 के यात्रियों को भी इस प्रॉजेक्ट से फायदा होगा। उन्होंने बताया है कि रेक्स को अपडेट किया जा रहा है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि रेलवे ब्लॉक्स के कारण कितनी ट्रेनें प्रभावित होंगी। 


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