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मुंबई : मुंबई में बीएमसी और पश्चिम रेलवे के बीच 145 करोड़ रुपए की पेनल्टी और 338 करोड़ रुपए के वे-लीव शुल्क को लेकर जारी लड़ाई में आम मुंबईकरों पिस रहे हैं। इसी रस्साकशी के चलते दादर मिडटाउन टर्मिनस को पिछले 15 वर्षों से वॉटर कनेक्शन नहीं मिल पाया है और उसकी पूरी पानी की जरूरत टैंकरों से पूरी की जा रही है। इसका प्रभाव रोजाना 20 से 25 हजार यात्रियों के साथ-साथ रेलवे कर्मचारियों और कॉलोनियों में रहने वाले परिवारों पर भी पड़ रहा है, जिन्हें पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। सूत्रों के अनुसार, दादर मिडटाउन टर्मिनस को प्रतिदिन लगभग 4.85 लाख लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जिसकी पूरी आपूर्ति फिलहाल टैंकरों से की जा रही है। प्रतिदिन आठ लंबी दूरी की ट्रेनों और 20 से 25 हजार यात्रियों की आवाजाही वाले इस टर्मिनस को अब तक स्थायी जल कनेक्शन नहीं मिल सका है। बताया गया है कि विवाद की जड़ 15-16 वर्ष पुराना जल बिल और उस पर लगाई गई 145 करोड़ रुपए की पेनल्टी है।

बताया गया है कि मूल बकाया 245 करोड़ रुपए का भुगतान वर्षों पहले किया जा चुका है, जबकि पिछले 10-12 वर्षों से जल बिल नियमित रूप से चुकाए जा रहे हैं। वर्ष 2024 और 2025 में डीआरएम द्वारा बीएमसी आयुक्त को लिखे गए पत्रों में भी मूल बकाया के भुगतान और केवल दंडात्मक राशि को लेकर विवाद जारी रहने का उल्लेख किया गया है।

सूत्रों के अनुसार बीएमसी पर पश्चिम रेलवे के 338 करोड़ रुपए के वे-लीव चार्जेज बकाया है। ये शुल्क रेलवे भूमि और पटरियों से गुजरने वाले रोड ओवर ब्रिज, बिजली लाइनों व अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए देय होते है। मुंबई रेलवे का तर्क है कि 145 करोड़ रुपए की पेनल्टी की मांग के साथ बीएमसी को उसके बकाया वे लीव शुल्क का भी भुगतान करना चाहिए। रेलवे को बीएमसी ने पिछले 15 वर्षों में कोई नया जल कनेक्शन नहीं दिया। पश्चिम रेलवे का बीएमसी के साथ इस गंभीर विषय को सुलझाने के लिए लगातार फॉलोअप जारी है। यदि इसमें सफलता मिलती है, तो इससे न केवल रेलवे कर्मियों, बल्कि आम यात्री राहत महसूस करेंगे।


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