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मुंबई : रोहित पवार ने एक कथित संदिग्ध मौत के मामले को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ नेता, जिन्होंने करीब 40 वर्षों तक जनता की सेवा की, उनकी मौत के बाद भी उचित जांच शुरू नहीं की गई। रोहित पवार ने दावा किया कि यह मामला हादसा या साजिश दोनों में से कुछ भी हो सकता है, लेकिन इसकी सच्चाई सामने लाने के लिए एफआईआर दर्ज होना जरूरी था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई, पुणे और बारामती जैसे प्रमुख शहरों में “जीरो एफआईआर” तक दर्ज नहीं की गई, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। 

उन्होंने आगे बताया कि इस मुद्दे को लेकर उन्होंने राहुल गांधी से भी मुलाकात की थी। उनके अनुसार, राहुल गांधी ने उन्हें ऐसे राज्य में जाने की सलाह दी, जहां न्याय मिलने की संभावना हो। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक में एफआईआर दर्ज कराई। रोहित पवार ने कहा कि कर्नाटक में दर्ज की गई एफआईआर वहां के डीजीपी के माध्यम से महाराष्ट्र के डीजीपी तक भेजी गई है। अब यह देखना होगा कि महाराष्ट्र सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि इतने गंभीर मामले में देरी या लापरवाही न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सरकार को तुरंत निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है कि मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए।

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