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मुंबई : सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को शिवसेना और उसके चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद पर एक बार फिर सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 फरवरी की तारीख तय की है। शिवसेना के साथ-साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नाम और चुनाव चिन्ह पर होने वाली सुनवाई भी टल गई है। ऐसे में माना जा रहा कि कोर्ट के फैसले का असर स्थानीय निकाय चुनाव नतीजों में शक्ति संतुलन कायम करने पर भी पड़ सकता है। इससे पहले, बीते बुधवार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन कोर्ट के समक्ष कुछ आवश्यक मामले आने की वजह से सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी गई थी। मामले की अगली तारीख तय करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने साफ किया है कि सभी पार्टियों को बहस के लिए पांच घंटे का समय दिया जाएगा।

शिवसेना में फूट के बाद चुनाव आयोग ने अपने फैसले में एकनाथ शिंदे गुट को ही असली शिवसेना मानते हुए चुनाव-चिन्ह धनुष-बाण दिया था। इसके बाद उद्धव गुट ने चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद से इस मामले पर अब तक अंतिम सुनवाई नहीं हो पाई है। ओबीसी आरक्षण मामले पर 27 जनवरी को सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण मामले पर 27 जनवरी को सुनवाई हो सकती है।

 इस मामले पर बीते बुधवार को ही सुनवाई होनी थी, लेकिन महत्वपूर्ण मामलों की वजह से कोर्ट ने सुनवाई टाल दी थी। अब इस मामले पर सुनवाई की तारीख तय हो गई है। कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि जिन 57 स्थानीय निकाय में आरक्षण 50 प्रतिशत से ज़्यादा हो गई है, वहां चुनाव के नतीजे कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेंगे। इन 57 स्थानीय निकायों में 40 नगर निगम और 17 नगर पंचायतें शामिल हैं। 

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