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मुंबई में स्कूल बस ऑपरेटरों ने कहा है कि वे डीजल और पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के चलते ऐसा कर रहे हैं. साथ ही बताया कि, COVID-19 महामारी से पहले की दरों की तुलना में, चालू शैक्षणिक वर्ष में छात्रों को फेरी लगाने के लिए कम से कम 20 प्रतिशत शुल्क बढ़ाएंगे.

बस ऑपरेटरों का कहना है कि फ्यूल की बढ़ती कीमतों, महामारी के प्रकोप, कर्मचारियों की कमी और शहर की परिवहन सेवा को प्रभावित करने वाली बसों की संख्या में गिरावट के कारण उनकी मांग उचित है. वहीं, स्कूलों का कहना है कि, अभिभावकों से बातचीत के बाद स्कूल बस की फीस 20 फीसदी बढ़ाने पर सहमति बन सकती है. पिछली बार किराए में बढ़ोतरी को तीन साल पहले मंजूरी दी गई थी.

बस ऑपरेटरों ने कहा कि उन्हें विभिन्न कारणों से स्कूल बस फीस बढ़ाने के लिए मजबूर किया गया है. इसमें सबसे ज्यादा असर फ्यूल की कीमतों में वृद्धि से पड़ा है. इसके बाद ड्राइवरों और अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान, बस की लागत में वृद्धि, आरटीओ फीस, यातायात जुर्माना और पिछले दो वर्षों में भुगतान किया गया जुर्माना स्कूल बसों की फीस में बढ़ोतरी के कारण बने हैं.

स्कूल बस मालिकों के अध्यक्ष अनिल गर्ग ने कहा कि प्रकोप से पहले, शहर में लगभग 8,500-9,000 बसें चल रही थीं. लेकिन विभिन्न कारणों से, हमने महामारी के बाद से लगभग 20% बसें खो दी हैं. ऐसे में कर्मचारियों को वेतन के भुगतान में दिक्कतें आ रही हैं.

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