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    मुंबई और उपनगरों में ट्रैक के किनारे रेलवे के भूखंड पर कई दशक से लोग बसते रहे हैं। मुंबई में कुर्ला से लेकर घाटकोपर,भांडुप, मुलुंड और ठाणे तक बड़ी संख्या में झोपड़े रेलवे की जमीनों पर बसे हैं । कुर्ला-ठाणे 5 वीं 6 ठी लाइन बनाते समय इनकी वजह से देरी भी हुई। राज्य सरकार के सहयोग से झोपड़ाधारकों का पुनर्वास किए जाने के बाद ही परियोजना शुरू हो सकी। इसके बाद ठाणे-दिवा,ठाणे-एरोली मार्ग पर भी अतिक्रमण हटाना पड़ा। कल्याण के आगे कसारा और कर्जत मार्ग पर भी रेलवे की जमीन पर काफी अतिक्रमण हुआ है। कलवा के एक झोपड़ाधारक सुरेश यादव ने कहा कि यहां लोग 1995 से ही बसे हुए हैं।

वैसे रेलवे की जमीनों पर अतिक्रमण कोई नई बात नहीं है। पिछले कई दशकों से रेलवे के खाली भूखंडों पर कब्ज़ा होता रहा है। मध्य रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रेलवे की जमीनों पर अतिक्रमण में सबसे बड़ा हाथ स्थानीय पोलिटिशियन और पटवारी का भी होता है, हालांकि अपनी जमीन बचाने की जिम्मेदारी रेलवे की भी है। कुछ जगहों पर रेलवे ने अब अपनी बची जमीनों पर चारदिवारी बनाने का काम शुरू किया है।

उपनगर कल्याण इलाकें में झोपड़ाधारकों को रेलवे की नोटिस मिलने के बाद सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कहा कि अतिक्रमण की वजह से रेलवे का कोई प्रोजेक्ट नहीं रुकने वाला, लेकिन झोपड़ाधारक पिछले 30-40 साल से बसे हुए हैं। उनका योग्य पुनर्वास होना चाहिए। सांसद डॉ. शिंदे ने इस मामले में रेल राज्य मंत्री रावसाहेब दानवे को पत्र दिया और फोन पर भी चर्चा की है। उन्होंने कहा कि कोरोना की चल रही तीसरी लहर को देखते हुए ऐसी स्थिति में झोपड़ाधारकों को बेघर करना उचित नहीं होगा। रेल राज्य मंत्री ने भी इस संबंध में अगले सप्ताह संबंधितों की बैठक बुलाने का आश्वासन दिया है। सांसद शिंदे ने मध्य रेल प्रशासन को भी पत्र दिया है।

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